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मोदी सरकार के नए बजट से निराश कुछ किसानों ने दिया उसे “चुनावी नौटंकी ” का करार। जानिए क्या है पूरा मामला।

source: Sarita Magzine
Written by FGV Team

कल आखिर बजट में किसानो को इतना फायदा देना ज़ाहिर है चुनावी दाव है और धीरे धीरे किसान भी समझ रहें हैं और इसे चुनावी नौटंकी का करार दे रहे हैं। उनका कहना है की आखरी वक़्त में इतने काम पैसों से किसी का भला होने वाला नहीं हैं। और ना वह इन पैसों से क़र्ज़ चुकाएँगे।

मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कांधला गांव में रहने वाले विशाल का है जो शामली के एकमात्र कॉलेज से कृषि विज्ञान में ग्रैजुएशन करना चाहते थे. लेकिन, रीढ़ के निचले हिस्से में लगी गहरी चोट के कारण पिछले छह महीने से वह बिस्तर पर ही लेटे हैं. ऐसे में विशाल के मां के लिए उन्हें डॉक्टर से दिखाना तो दूर, चार लोगों के परिवार का पेट पालना भी मुश्किल हो रहा है. विशाल के परिवार के पास कुछ एकड़ जमीनें हैं, जिस पर वे गन्ने की खेती किया करते थे. हालांकि पिछले एक साल से चीनी मिल ने उनका बकाया नहीं चुकाया है. इस परिवार के पास दो भैंसें हैं और उनका दूध बेचकर ही घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो रही हैं.

दिल्ली-शामली रोड के पास ही स्थित कांधला गांव के लोग इस साल के बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. गन्ना बेल्ट के नाम मशहूर इस इलाके के लोग चीनी मिलों के पास पड़े अपने बकाये रकम को लेकर परेशान थे ही, वहीं हाल के दिनों आवारा पशुओं द्वारा फसल के नुकसान से उनकी मुसीबत और बढ़ गई है.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत छोटे किसानों को सालाना छह हजार रुपये की मदद दिए जाने का ऐलान किया है. यह रकम दो-दो हजार रुपये की तीन किश्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में डाले जाएंगे.
हालांकि अगर गौर से देखें तो यह राशि हर दिन का 17 रुपये बैठती है. ऐसे में ये किसान सरकार की इस योजना को बस ‘चुनावी नौटंकी’ करार दे रहे हैं. उनकी शिकायत है कि आखिर इतनी छोटी सी रकम से वह अपना कर्ज कैसे चुका पाएंगे.

ऐसे ही किसानों में लिलन गांव के राहुल चौधरी भी शामिल हैं. बजट वाले दिन वह पूरा वक्त टीवी से ही चिपके रहे. चौधरी के मुताबिक, उन्हें मोदी सरकार के इस आखिरी बजट से काफी उम्मीदें थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बजट में ‘किसानों की भलाई’ के लिए कई कदम उठाए जाएंगे, लेकिन उन्हें इसमें ऐसा कोई खास ऐलान नहीं दिख रहा.

source: India Express

चौधरी कहते हैं, ‘भला इस छह हजार रुपये में क्या होता है? खाद और कीटनाशकों का खर्च ही हजारों रुपये बैठता है. ऐसे में इतनी रकम से किसानों का आखिर क्या भला होगा? अगर सरकार गन्ना किसानों का बकाया दबाकर रखने वाले चीनी मिल मालिकों पर नकेल कसती तो किसानों को ज्यादा खुशी होती.’ वहीं कांधला गांव के ही एक अन्य किसान विकास कहते हैं, ‘न खाद्य-बीज पर सब्सिडी दी गई. यह महीने के 500 रुपये से क्या होता है? क्या हम भीखारी है? हमें कोई भीख नहीं चाहिए. चीनी मिल वाले हमारा बकाया कब से दबाए बैठे हैं. ऐसे में इस 500 रुपये से भला क्या होगा.’

हालांकि कुछ ग्रामीण इस बजट में कुछ राहत वाली खबर भी देख रहे हैं. दरअसल वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने गायों की देखभाल के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग गठित करने की घोषणा की. सरकार ने इसके तहत राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 750 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. शामली के किसान इसे एक अहम ऐलान मानते हैं. पिछले कई महीनों से वे आवारा मवेशियों की समस्या से जूझ रहे हैं. उनकी शिकायत रही है कि ये मवेशी उनकी खड़ी बर्बाद कर दिया करते हैं. इन किसानों का कहना है कि सरकार के इस कदम से इन मवेशियों की समस्या पर थोड़ी लगाम जरूर लगाई जा सकेगी. source: News18 Hindi

 

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