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जब किसी की जिंदगी से बड़ी हो गई सरहदें..

Written by vivek

 

पाकिस्तान को हॉकी विश्व कप जीतने में अहम भूमिका निभाने वाले दिग्गज हॉकी खिलाड़ी मंसूर अहमद का निधन हो गया है। हॉकी गोलकीपर मंसूर अहमद का लंबे समय तक दिल की बीमारी से जूझने के बाद शनिवार (12 मई) को पाकिस्तान के एक अस्पताल में निधन हो गया। ओलिंपिक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले 49 साल के अहमद पिछले काफी समय से दिल में लगे पेसमेकर और स्टेंट से परेशान थे। उन्होंने हृदय प्रत्यारोपण के लिए भारत से भी संपर्क किया था।दिग्गज खिलाड़ी मंसूर पिछले लंबे समय से दिल की बीमारी से जुझ रहे थे। उन्हें हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत थी जिसके लिए उन्होंने भारत से मदद भी मांगी थी। मंसूर को भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट कराने के लिए मदद चाहिए थी, साथ ही उन्होंने मेडिकल वीजा के लिए भी भारत सरकार से मदद मांगी थी। मंसूर को भारत से बहुत से लोगों ने मदद की पेशकश की थी जिसमें चेन्नई का फोर्टिस अस्पताल भी शामिल है, लेकिन मदद मिलने से पहले ही मंसूर जिंदगी की लड़ाई हार गए।
पाकिस्तान के लिए 388 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इस महान खिलाड़ी को 1994 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पेनाल्टी शूट में गोल का बचाव कर पाकिस्तान को विश्व विजेता बनाया था। इसी साल उन्होंने चैंपियंस ट्रोफी के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट का बचाव किया था जिससे पाकिस्तान इसका विजेता बना था।


वीडियो जारी कर की थी अपील

पिछले दिनों खुद मंसूर अहमद ने एक वीडियो जारी कर भारत सरकार और यहां के लोगों से हार्ट के लिए मदद मांगी थी। मंसूर ने साफ किया था कि उन्हें भारत से आर्थिक मदद की दरकार नही हैं वो केवल वीजा चाहते थे ताकि भारत जाकर इलाज करवा पाएं। फिलहाल उनका सारा खर्च पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी का फाउंडेशन उठा रहा था। शाहिद अफरीदी उनसे मिलने भी गए थे और उन्होंने अपनी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।दिग्गज खिलाड़ी मंसूर पिछले लंबे समय से दिल की बीमारी से जुझ रहे थे। उन्हें हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत थी जिसके लिए उन्होंने भारत से मदद भी मांगी थी। मंसूर को भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट कराने के लिए मदद चाहिए थी, साथ ही उन्होंने मेडिकल वीजा के लिए भी भारत सरकार से मदद मांगी थी। मंसूर को भारत से बहुत से लोगों ने मदद की पेशकश की थी जिसमें चेन्नई का फोर्टिस अस्पताल भी शामिल है, लेकिन मदद मिलने से पहले ही मंसूर जिंदगी की लड़ाई हार गए।
पाकिस्तान के लिए 388 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इस महान खिलाड़ी को 1994 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पेनाल्टी शूट में गोल का बचाव कर पाकिस्तान को विश्व विजेता बनाया था। इसी साल उन्होंने चैंपियंस ट्रोफी के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट का बचाव किया था जिससे पाकिस्तान इसका विजेता बना था।


वीडियो जारी कर की थी अपील
पिछले दिनों खुद मंसूर अहमद ने एक वीडियो जारी कर भारत सरकार और यहां के लोगों से हार्ट के लिए मदद मांगी थी। मंसूर ने साफ किया था कि उन्हें भारत से आर्थिक मदद की दरकार नही हैं वो केवल वीजा चाहते थे ताकि भारत जाकर इलाज करवा पाएं। फिलहाल उनका सारा खर्च पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी का फाउंडेशन उठा रहा था। शाहिद अफरीदी उनसे मिलने भी गए थे और उन्होंने अपनी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।अहमद ने वीडियो जारी कर भारत सरकार से कहा था, ”मैंने भारत के खिलाफ कई टूर्नामेंट जीते हैं और बहुत से भारतीयों का दिल तोड़ा है। इंदिरा गांधी कप, एशिया कप, वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स वहां (भारत) हमने जीते। लेकिन आज मुझे हार्ट की जरूरत है और भारतीय सरकार और खासतौर पर सुषमा स्वराज की मदद की जरुरत है। मैं उनसे अपनी वीजा एप्लिकेशन को प्रोसेस करने का अनुरोध करता हूं, ताकि मैं जल्द से जल्द आ सकूं और पुरानी यादें ताजा कर सकूं। मैं पूर्व भारतीय खिलाड़ी धनराज से मिलना चाहता हूं। धनराज जब पाकिस्तान लीग में खेलने आए तो वह मेरी कोचिंग में ही खेले थे।”

सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन
मंसूर अहमद के निधन को लेकर भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। एक यूजर्स ने लिखा है, “पाकिस्तान हॉकी के मशहूर दिग्गज खिलाड़ी मंसूर अहमद जो भारत आकर अपना इलाज करवाना चाहते थे, उनका दिल की बीमारी से निधन हो गया। इन दो देशों के बीच यदि इतनी मजबूत सरहदें न होती तो शायद जिंदगी थोड़ी लम्बी हो सकती थी।”
वहीं यूजर्स का कहना है कि पाकिस्तान कश्मीर जिहाद के नाम पर ढेरो विदेशी फंडिंग,आतंकवादियों को पालने में खर्च होते है,पर अच्छे हॉस्पिटल और स्कूल प्राथमिकता नही है।

 

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