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डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग की सफल बातचीत भारत को देगी, ये ख़ास तीन फायदे

Written by vivek

अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-उन के बीच 12 जून को सिंगापुर में शिखर वार्ता होने जा रही है। इस बातचीत पर भारत सहित दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। इस बातचीत का असली मकसद क्या है? इससे भारत को क्या फायदा होगा, इस बारे में DainikBhaskar.com ने बात की JNU में इंटरनेशनल स्टडीज के एक्स प्रोफेसर एस.डी. मुनि, फॉरेन एंड स्ट्रेटेजिक अफेयर्स एक्सपर्ट मेजर जनरल (रिटा.) अफसिर करीम और चाइना मामलों की विशेषज्ञ नम्रता हसीजा से।
भारत को क्या फायदे?
अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच बातचीत से भारत को डायरेक्ट कोई भी फायदा नहीं होगा। लेकिन इनडायरेक्टली उसे ये 3 फायदे हो सकते हैं :
1.चीन का प्रभाव कम होगा तो भारत का फायदा :
प्रोफेसर एस.डी. मुनि और नम्रता हसीजा का कहना है कि अगर बातचीत सफल रहती है तो इससे कोरिया पेनुन्सिएला क्षेत्र में चीन का प्रभाव घटेगा। अभी नॉर्थ कोरिया पूरी तरह से चीन पर निर्भर है। चीन उसे अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते आया है। लेकिन बातचीत सफल होने से नॉर्थ कोरिया का अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के प्रति रुझान भी बढ़ेगा। इसका चीन को नुकसान उठाना पड़ सकता है और भारत को फायदा।
2.आर्थिक प्रतिबंध हटने से मिलेंगे कांट्रैक्ट
शुरुआती बातचीत में तो प्रतिबंधों के हटने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन अगर भविष्य में आर्थिक प्रतिबंध हटते हैं तो इसका इनडायरेक्टी फायदा भारत को हो सकता है। नॉर्थ कोरिया को बुनियादी ढांचे के विकास में काफी मदद की जरूरत पड़ेगी।
3.ऑयल एंड नैचुरल गैस एक्स्प्लोरेशन
हालांकि नॉर्थ कोरिया अपनी तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरतों के लिए इम्पोर्ट पर निर्भर है। लेकिन वहां तेल के विशाल भंडारों के संकेत मिले हैं। आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वह इनका दोहन नहीं कर पा रहा है। इंडिया इसमें भी मदद करके अपने लिए फायदा ढूंढ सकता है।
परमाणु हथियार तो बस बहाना है, असली मकसद कुछ और!
बातचीत के 3 प्लेयर्स, 3 असली मकसद
प्लेयर नंबर 1 : अमेरिका
नॉर्थ कोरिया अब तक छह न्यूक्लियर टेस्ट कर चुका है। 30 नवंबर 2017 को उसने जिस मिसाइल ‘Hwasong-15’ का परीक्षण किया, उसकी रेंज 5 हजार किमी से भी ज्यादा है।
ऊपरी मकसद : परमाणु खतरे को रोकना
नॉर्थ कोरिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अमेरिका उसकी परमाणु क्षमता को कम करने की शर्त रख सकता है। ऐसा होने पर परमाणु हमले का खतरा कम हो सकेगा।
असली मकसद : ताकि रूस के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके
व्लादिमीर पुतिन के कारण रूस फिर से मजबूत होता नजर आ रहा है। दुनिया के कई देश रूस की ओर देख रहे हैं। नॉर्थ कोरिया को बातचीत की टेबल पर लाने भर से ही अमेरिका को विश्व बिरादरी में फिर से अपनी अहमियत साबित करने का मौका मिलेगा।
प्लेयर नंबर 2 : नॉर्थ कोरिया
साल 2006 में पहले न्यूक्लियर टेस्ट के तत्काल बाद यूएन सेक्युरिटी काउंसिल ने नॉर्थ कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। हर न्यूक्लियर टेस्ट के बाद से इन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता ही गया है।
ऊपरी मकसद : आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करवाना
11 सितंबर 2017 के दिन यूएन काउंसिल ने क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस के इम्पोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिए। इससे नॉर्थ कोरिया के हालात काफी बदतर हो गए। नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों को खत्म करवाना चाहता है।
असली मकसद : आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना
किम जोंग ने अपने देश में इकोनॉमिक सुधार के कई कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। वहां निजीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में किम जोंग ने ऐसे कदम उठाने की बात कही थी जिससे इकोनॉमी पर फोकस किया जा सके। इसीलिए वे जल्दी से जल्दी आर्थिक प्रतिबंध हटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्लेयर नंबर 3 : चीन
नॉर्थ कोरिया की वजह से सालों से कोरिया पेनुन्सिएला में तनाव के हालात बने हुए हैं। अमेरिका के जंगी जहाज वहां मंडराते रहते हैं।
ऊपरी मकसद : कोरिया पेनुन्सिएला में तनाव को कम करना
कोरिया पेनुन्सिएला में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति खुद चीन के लिए कम्फर्ट नहीं है। इसलिए ऊपरी तौर पर चीन शांति के नाम पर बातचीत के समर्थन में नजर आ रहा है।
असली मकसद : अपनी इकोनॉमी को बूस्ट करना
इस समय चीन की इकोनॉमी काफी प्रेशर में है। फिच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार विशाल कारपोरेट कर्ज के कारण चीन की विकास दर 4.5 फीसदी पर सिमट सकती है जो हाल के वर्षों में सबसे कम है। ऐसे में चीन को एक उम्मीद इस बातचीत से भी है। नार्थ कोरिया के सबसे अच्छे संबंध चीन से ही हैं। साथ ही दोनों की सीमाएं भी एक-दूसरे से सटी हुई हैं। ऐसे में आर्थिक प्रतिबंध हटने या कम होने का सबसे ज्यादा फायदा चीन को ही मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार प्रतिबंध कम होने से चीन को नार्थ कोरिया से 250 अरब डॉलर के बिजनेस कांट्रैक्ट मिल सकते हैं।

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