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क्या परिवारवाद है कांग्रेस की लगातार हार और पतन का कारण

Written by FGV Team

परिवारवाद पर अनेकों आलोचनाओं का शिकार होने के बावजूद कांग्रेस इससे बाज नहीं आ रही है| आपको बता दे की, बीते समय में स्वयं अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओ का विरोध झेलने के बाद प्रदेश प्रभारी पी.एल पूनिया ने विरोधी कार्यकर्ताओं को यह आश्वासन दिया था की इस बार सभी का ध्यान रखा जाएगा लेकिन आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी -“चोर चोरी से जाए लेकिन सीनाजोरी से ना जाए”, परिवारवाद के मुद्दे पर कांग्रेस पर यह कहावत बिलकुल फिट बैठती है| अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिए आश्वासन के बावजूद कांग्रेस ने नए चेहरों को मौका देने के नाम पर परिवारवाद की राजनीति की चाल चली है| जहाँ एक और हाल ही में पीसीसी की नई टीम में सात परिवार से 16 लोग पीसीसी डेलीगेट्स बनाए गए हैं।

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जिसकी सूची में  वरिष्ठ नेताओं से लेकर विधायक तक के परिवार के सदस्य शामिल हैं। जैसे – मोतीलाल वोरा परिवार – अरुण वोरा, अरविंद वोरा (बेटे) और राजीव वोरा (गोविंदलाल वोरा के बेटे)। ताम्रध्वज साहू – जितेंद्र साहू (बेटा)। सत्यनारायण शर्मा -पंकज शर्मा (बेटा) – अमितेश शुक्ला – भवानी शुक्ला (बेटा)। लक्ष्मण चंद्राकर- प्रतिमा चंद्राकर (बहन)। महेंद्र बहादुर – देवेंद्र बहादुर (बेटा)। कवासी लखमा – गीता कवासी लखमा (पत्नी)।तथा इसी प्रकार विधायक कवासी लखमा के साथ उनकी पत्नी और लक्ष्मण चंद्राकर अपनी बहन को पीसीसी डेलीगेट बनवाने में सफल रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ) की सूची में भी प्रदेश के जिन 49 लोगो को स्थान दिया गया है| जिसका उल्लेख करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने स्वयं कहा था की इस बार युवामतदाताओं को ध्यान में रखते हुए AICC की सूची में 15 युवा नेताओं को शामिल किया गया है|

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परन्तु असल में सत्य इसके बिलकुल विपरीत है और युवाओं के नाम पर कांग्रेस पार्टी ने छलावा करते हुए 40 के अघेड़त्व उम्र के नेताओं को ही जगह दी है| AICC की टीम में भी नेता के परिवार के लोगो को ही मौका दिया गया है, यहाँ तक की जिन नए चेहरों के शामिल होने की बात कही जा रही है उनमें से भी अधिकतर कांग्रेस पार्टी के पुराने कार्यकर्ता ही शामिल है जिनके भरोसे कांग्रेस पहले भी 3 विधानसभा चुनाव हार चुकी है और इस बार भी इसी रह पर अग्रसर है| मोजूदा जानकारी के अनुसार कांग्रेस के नयेपन और युवा अवसरों को लेकर किये गए सभी दावे खोखले साबित होते है जिसके बाद यह कहना हरगिस गलत नहीं होगा- कांग्रेस, “चेहरे वहीं – चाल नई” का टीज़र बना देश को दी गयी अपनी पुरानी परिवारवाद की रणनीति पर ही कायम है|

 

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